Image from https://x.com/rahat_up
नमस्कार दोस्तों!
आप सभी का BhojpuriTrend पर एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। मानसून शुरू होते ही गाँव-देहात में एक समस्या तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन लोग इसके बारे में समय रहते गंभीर नहीं होते। यह समस्या है साँप के काटने (Snakebite) की। आइए
जानते हैं Snakebite and Death Cases Se Kaise Bachein ?
भोजपुरी क्षेत्र – पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में हर वर्ष बरसात के मौसम में साँप निकलने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। दुर्भाग्य से इनमें से कई मामले समय पर सही इलाज न मिलने के कारण मृत्यु तक पहुँच जाते हैं।
इस विषय पर लिखने का उद्देश्य किसी प्रकार का डर फैलाना नहीं है। मेरी कोशिश केवल इतनी है कि सही जानकारी हर परिवार तक पहुँचे ताकि अनावश्यक जान-माल की हानि रोकी जा सके।
क्या आपको पता है?
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने साँप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए National Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenoming (NAPSE) नामक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया है। https://rahat.up.nic.in/sbms/index-hindi.php
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2013803®=48&lang=2
इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक Snakebite से होने वाली मौतों को लगभग आधा करना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार भी Snakebite को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या मानती है।
हमारे भोजपुरी क्षेत्र में Snakebite के मामले अधिक क्यों आते हैं?
यदि आप उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों या बिहार के पश्चिमी भाग से हैं, तो आपने लगभग हर वर्ष किसी न किसी व्यक्ति के साँप काटने की खबर अवश्य सुनी होगी। इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं।
1. खेतों में अधिक काम करना
हमारे क्षेत्र के अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं। बरसात के मौसम में किसान सुबह से शाम तक खेतों में काम करते हैं। इसी दौरान साँपों से सामना होने की संभावना बढ़ जाती है।
2. घरों के आसपास झाड़ियाँ और पानी जमा होना
बरसात में घरों के आसपास घास, झाड़ियाँ और जलभराव बढ़ जाता है। ऐसे स्थान साँपों के छिपने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
3. रात में अंधेरे में चलना
कई गाँवों में आज भी पर्याप्त रोशनी नहीं होती। लोग बिना टॉर्च या उचित प्रकाश के बाहर निकल जाते हैं, जिससे अनजाने में साँप पर पैर पड़ सकता है।
4. ज़मीन पर सोने की आदत
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक लोग गर्मियों और बरसात के मौसम में फर्श या जमीन पर सोते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत विशेष रूप से Common Krait जैसे साँपों के काटने का जोखिम बढ़ा देती है क्योंकि यह साँप अधिकतर रात में सक्रिय रहता है।
5. समय पर अस्पताल न पहुँचना
दुर्भाग्य की बात यह है कि कई परिवार पहले घरेलू उपचार, झाड़-फूँक या ओझा के पास चले जाते हैं। इस कारण इलाज में देरी होती है और मरीज की स्थिति गंभीर बन जाती है। मेरे एक दोस्त के पिताजी का देहांत इसी वजह से हुआ, उनको जब सांप (गेहुंवान) ने काटा तो वो खेत से भाग कर घर आए, तब लोगों ने सबसे पहले उसे एक झाड़ फूंक (सम्मान के साथ) के पास ले गए। जिस रास्ते से वो गए उसी रास्ते में अस्पताल था लेकिन वहां नहीं गए। आख़िरकार जब लोग उनको हॉस्पिटल ले गए तब तक देर हो चुकी थी। 🙁
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मौतें साँप के काटने से नहीं बल्कि इलाज में देरी होने के कारण होती हैं।
Snakebite होने पर सबसे पहले क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को साँप काट ले, तो सबसे महत्वपूर्ण बात घबराना नहीं है। हर साँप जहरीला नहीं होता और घबराहट कई बार मरीज की स्थिति को और खराब कर देती है।
सबसे पहले ये पाँच काम करें
✅ मरीज को शांत रखें और उसे भरोसा दिलाएँ कि समय पर इलाज मिलने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है।
✅ जिस हाथ या पैर में साँप ने काटा है, उसे बिल्कुल कम हिलाएँ। यदि संभव हो तो लकड़ी या किसी मजबूत सहारे से स्थिर रखें।
✅ अंगूठी, कंगन, घड़ी, जूते या तंग कपड़े तुरंत निकाल दें क्योंकि कुछ ही समय में सूजन बढ़ सकती है।
✅ मरीज को पैदल चलाने के बजाय वाहन, स्ट्रेचर या अन्य सुरक्षित साधन से अस्पताल पहुँचाने का प्रयास करें।
✅ जितनी जल्दी हो सके ऐसे सरकारी या निजी अस्पताल जाएँ जहाँ Anti Snake Venom (ASV) उपलब्ध हो।

Snakebite होने पर क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई ऐसे घरेलू तरीके अपनाए जाते हैं जो वैज्ञानिक रूप से गलत हैं और मरीज की जान को खतरे में डाल सकते हैं।
इन गलतियों से हमेशा बचें।
❌ हाथ या पैर पर बहुत कसकर कपड़ा या रस्सी न बाँधें।
❌ घाव को किसी भी हालत में काटने की कोशिश न करें।
❌ मुँह से जहर निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें।
❌ घाव पर मिट्टी, हल्दी, जड़ी-बूटी, केमिकल या तथाकथित “काला पत्थर” न लगाएँ।
❌ घाव को जलाएँ या बर्फ न रखें।
❌ शराब या किसी प्रकार का नशीला पदार्थ न दें।
❌ झाड़-फूँक या ओझा के चक्कर में समय बिल्कुल बर्बाद न करें।
❌ साँप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। इससे दूसरा व्यक्ति भी खतरे में पड़ सकता है।
किन लक्षणों को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?
यदि Snakebite के बाद नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल पहुँचना चाहिए।
- आँखों की पलकों का झुकना।
- बोलने में कठिनाई होना।
- निगलने में परेशानी होना।
- साँस लेने में दिक्कत होना।
- मसूड़ों या नाक से खून आना।
- पेशाब या मल में खून दिखाई देना।
- काटे हुए स्थान पर तेजी से सूजन बढ़ना।
- बहुत तेज दर्द या त्वचा का काला पड़ना।
- शरीर में कमजोरी या लकवे जैसे लक्षण महसूस होना।
इन संकेतों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यही ज़हरीले साँप के प्रभाव के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
अस्पताल में कौन-सा इलाज किया जाता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि किसी घरेलू दवा या जड़ी-बूटी से साँप का जहर उतर जाता है, लेकिन यह धारणा सही नहीं है। यदि जहरीले साँप ने काटा है, तो उसका वैज्ञानिक और प्रभावी उपचार Anti Snake Venom (ASV) ही माना जाता है।
डॉक्टर मरीज की स्थिति, लक्षण और आवश्यक जाँच के आधार पर तय करते हैं कि ASV देना है या नहीं। इसलिए स्वयं दवा लेने के बजाय प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह पर ही इलाज कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
Snakebite and Death Cases Se Kaise Bachein? उत्तर प्रदेश और बिहार में Snakebite से सबसे अधिक मौतें क्यों होती हैं?
बहुत से लोगों को लगता है कि साँप का ज़हर ही मौत का सबसे बड़ा कारण होता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में मौत का कारण समय पर सही इलाज न मिलना होता है। यदि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुँचाया जाए और उचित उपचार मिले, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
आइए जानते हैं कि हमारे भोजपुरी क्षेत्र में Snakebite से होने वाली मौतों के प्रमुख कारण क्या हैं।
1. अस्पताल पहुँचने में देरी
यह सबसे बड़ा कारण माना जाता है। कई परिवार पहले घरेलू उपचार, झाड़-फूँक या ओझा के पास चले जाते हैं। इस प्रक्रिया में कई घंटे निकल जाते हैं और तब तक ज़हर पूरे शरीर में फैल सकता है।
इसलिए यदि आपको सच में जानना है कि Snakebite and deth cases se kaise bachein?, तो पहला उत्तर यही है कि बिना समय गंवाए मरीज को सीधे अस्पताल ले जाएँ।
2. घरेलू उपचार और अंधविश्वास पर भरोसा
आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग मानते हैं कि कुछ पारंपरिक तरीके साँप का ज़हर उतार सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोध और सरकारी उपचार दिशानिर्देश इन बातों का समर्थन नहीं करते।
इन गलत तरीकों से हमेशा बचना चाहिए—
- घाव को चाकू से काटना।
- रस्सी या कपड़े से बहुत कसकर बाँधना।
- मुँह से ज़हर चूसने की कोशिश करना।
- जड़ी-बूटी, मिट्टी या काला पत्थर लगाना।
- झाड़-फूँक या ओझा के भरोसे समय बर्बाद करना।
ये उपाय इलाज नहीं हैं, बल्कि मरीज की जान को और अधिक खतरे में डाल सकते हैं।
3. रात में Krait साँप का काटना
उत्तर प्रदेश और बिहार में Common Krait सबसे खतरनाक साँपों में माना जाता है। यह अधिकतर रात के समय सक्रिय रहता है और कई बार जमीन पर सो रहे लोगों को काट लेता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई बार काटने का निशान बहुत छोटा होता है या दिखाई ही नहीं देता।
शुरुआत में केवल पेट दर्द, उल्टी या कमजोरी महसूस होती है। लोग इसे सामान्य बीमारी समझ लेते हैं और अस्पताल जाने में देर कर देते हैं। कुछ घंटों बाद साँस लेने में परेशानी शुरू हो सकती है, जो जानलेवा साबित होती है।
4. साँस लेने में दिक्कत होना
कोबरा और करैत जैसे जहरीले साँपों का ज़हर शरीर की नसों और मांसपेशियों को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे मरीज की साँस लेने वाली मांसपेशियाँ कमजोर होने लगती हैं। यदि समय पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और Anti Snake Venom उपलब्ध न हो, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।
5. समय पर Anti Snake Venom (ASV) न मिलना
वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो जहरीले साँप के काटने का सबसे प्रभावी उपचार Anti Snake Venom (ASV) ही है। यदि मरीज को समय पर ASV मिल जाए, तो गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है।
इसलिए हमेशा ऐसे अस्पताल जाने का प्रयास करें जहाँ Snakebite का उपचार उपलब्ध हो।
6. Russell’s Viper के कारण किडनी पर असर
कुछ जहरीले साँप, विशेषकर Russell’s Viper, शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव, ब्लड प्रेशर कम होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यदि ऐसे मरीज को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और आवश्यकता पड़ने पर डायलिसिस न मिले, तो जान का खतरा बढ़ जाता है।
7. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है।
हमारे गाँवों में आज भी बहुत से लोग—
- नंगे पैर खेतों में काम करते हैं।
- रात में बिना टॉर्च बाहर निकल जाते हैं।
- जमीन पर सोते हैं।
- Snakebite को सामान्य घटना समझकर अस्पताल जाने में देरी कर देते हैं।
यदि केवल इन आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो अनेक दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
8. गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
कुछ मामलों में मरीज को केवल दवा नहीं, बल्कि गहन चिकित्सा (ICU) की आवश्यकता होती है।
यदि नजदीकी अस्पताल में—
- वेंटिलेटर,
- ऑक्सीजन,
- डायलिसिस,
- रक्त चढ़ाने की सुविधा,
- या प्रशिक्षित चिकित्सक उपलब्ध न हों,
तो मरीज को बड़े अस्पताल भेजना पड़ता है। इस दौरान हुई देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
Snakebite के बाद आमतौर पर क्या होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार में कई गंभीर मामलों का क्रम कुछ इस प्रकार होता है—
रात में करैत साँप काटता है → व्यक्ति को पता नहीं चलता → सुबह पेट दर्द या उल्टी होती है → धीरे-धीरे शरीर कमजोर होने लगता है → साँस लेने में कठिनाई होती है → अस्पताल पहुँचने में देर हो जाती है → स्थिति गंभीर हो जाती है।
यदि परिवार के लोग शुरुआती लक्षण पहचान लें और तुरंत अस्पताल पहुँच जाएँ, तो ऐसी कई घटनाओं में जान बचाई जा सकती है।
Snakebite and deth cases se kaise bachein? आसान बचाव के उपाय
साँप के काटने से बचने के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियाँ बहुत प्रभावी साबित होती हैं।
- जहाँ तक संभव हो, जमीन के बजाय चारपाई या बेड पर सोएँ।
- रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और उसे अच्छी तरह अंदर की ओर दबाकर लगाएँ।
- अंधेरे में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का प्रयोग करें।
- खेतों, झाड़ियों और पानी वाले स्थानों पर मजबूत जूते पहनकर जाएँ।
- घर के आसपास घास, झाड़ियाँ और लकड़ी का कचरा जमा न होने दें।
- चूहों की संख्या कम रखें क्योंकि साँप अक्सर भोजन की तलाश में उनके पीछे आते हैं।
- बच्चों को साँपों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की शिक्षा दें।
- किसी भी Snakebite की स्थिति में सीधे अस्पताल जाएँ और घरेलू उपचार पर भरोसा न करें।
याद रखिए, सही जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय किसी की जान बचा सकता है।
अगले और अंतिम भाग में हम जानेंगे कि गाँवों में Snakebite की घटनाओं को कैसे कम किया जा सकता है, परिवार और पंचायत स्तर पर क्या तैयारियाँ होनी चाहिए, सरकार की पहल क्या है, और इस पूरे विषय का सरल निष्कर्ष।
Snakebite and Death Cases Se Kaise Bachein? (भाग-3)
गाँव और परिवार मिलकर Snakebite की घटनाओं को कैसे कम कर सकते हैं?
मेरी राय में केवल सरकार या अस्पतालों के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। यदि गाँव का प्रत्येक परिवार थोड़ी जागरूकता अपनाए, तो हर वर्ष होने वाली अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि साँप इंसानों पर हमला करने नहीं निकलते। अधिकांश मामलों में वे केवल अपनी सुरक्षा के लिए काटते हैं। इसलिए हमारा उद्देश्य साँपों को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि स्वयं को सुरक्षित रखना होना चाहिए।
परिवार स्तर पर अपनाई जाने वाली सावधानियाँ
बरसात के मौसम में कुछ छोटी-छोटी आदतें आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा बढ़ा सकती हैं।
- घर के आसपास घास, झाड़ियाँ और कूड़ा-कचरा जमा न होने दें।
- लकड़ी, ईंट या भूसा खुले स्थान पर रखने के बजाय व्यवस्थित रखें।
- रात में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें।
- बच्चों को बिना चप्पल या जूते के खेतों और झाड़ियों में न जाने दें।
- बारिश के दिनों में घर के दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखने की आदत डालें।
- यदि घर में चूहे अधिक हैं, तो उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास करें क्योंकि साँप अक्सर भोजन की तलाश में वहाँ पहुँच जाते हैं।
ये छोटे प्रयास भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं से बचा सकते हैं।
किसानों के लिए विशेष सुझाव
हमारे भोजपुरी क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेती से जुड़े हैं। इसलिए किसानों को कुछ अतिरिक्त सावधानियाँ अवश्य अपनानी चाहिए। खेतों में काम करते समय मजबूत जूते पहनें। यदि संभव हो तो लंबे बूट और दस्तानों का उपयोग करें। धान, गन्ना या घनी फसल में हाथ डालने से पहले डंडे से हल्की आवाज़ कर लें ताकि यदि कोई साँप हो तो वह स्वयं हट जाए।
रात के समय खेतों में सिंचाई करते समय पर्याप्त रोशनी रखें। अंधेरे में कभी भी नंगे पैर खेतों में न जाएँ।
स्कूलों और पंचायतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है
यदि गाँव के स्कूलों और पंचायत भवनों में वर्ष में एक या दो बार Snakebite Awareness Program आयोजित किए जाएँ, तो बच्चों और ग्रामीणों में सही जानकारी पहुँच सकती है।
इन कार्यक्रमों में लोगों को बताया जा सकता है—
- साँप के काटने पर क्या करना चाहिए।
- कौन-सी गलतियाँ बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
- नजदीकी अस्पताल कहाँ है।
- एम्बुलेंस सेवा का उपयोग कैसे करें।
- प्राथमिक उपचार का सही तरीका क्या है।
जागरूकता जितनी बढ़ेगी, उतनी ही मौतों की संख्या कम होगी।
सरकार की इस पहल को जानना भी जरूरी है
भारत सरकार ने National Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenoming (NAPSE) शुरू किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक बनाना, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी है। यदि हम सभी इस अभियान के बारे में जानकारी रखें और दूसरों तक भी पहुँचाएँ, तो इसका लाभ लाखों लोगों तक पहुँच सकता है।
याद रखने का सबसे आसान नियम
यदि आपको पूरा लेख याद न रहे, तो केवल यह एक पंक्ति हमेशा याद रखिए—
“शांत रहें – काटे हुए अंग को स्थिर रखें – बिना देर किए अस्पताल पहुँचें।”
यही तीन कदम अधिकांश गंभीर परिस्थितियों में सबसे अधिक मददगार साबित होते हैं।

क्या हर साँप जहरीला होता है?
नहीं। भारत में पाए जाने वाले सभी साँप जहरीले नहीं होते। कई साँप बिल्कुल विषहीन होते हैं और इंसानों के लिए गंभीर खतरा नहीं बनते। लेकिन सामान्य व्यक्ति के लिए यह पहचानना आसान नहीं होता कि कौन-सा साँप जहरीला है और कौन-सा नहीं।
इसीलिए यदि किसी भी साँप के काटने का संदेह हो, तो उसे हमेशा गंभीरता से लें और तुरंत अस्पताल जाएँ। अनुमान लगाने में समय बर्बाद करना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि किसी को साँप काट ले तो परिवार क्या करे?
ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय एक व्यक्ति मरीज को संभाले और दूसरा तुरंत एम्बुलेंस या वाहन की व्यवस्था करे। यदि मोबाइल उपलब्ध हो, तो अस्पताल को पहले ही सूचना देना भी उपयोगी हो सकता है। इससे चिकित्सा टीम आवश्यक तैयारी कर सकती है। याद रखें कि परिवार का धैर्य और समय पर लिया गया निर्णय मरीज की जान बचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
“Snakebite and deth cases se kaise bachein?” इसका सबसे सरल उत्तर है—जागरूकता, सही प्राथमिक उपचार और बिना देरी अस्पताल पहुँचना।
मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि BhojpuriTrend के माध्यम से ऐसी जानकारी आप तक पहुँचे, जो केवल पढ़ने के लिए नहीं बल्कि जीवन में काम आने वाली हो। यदि इस लेख को पढ़ने के बाद एक भी परिवार झाड़-फूँक के बजाय सीधे अस्पताल जाने का निर्णय लेता है, तो मुझे लगेगा कि इस लेख का उद्देश्य सफल हो गया।
यदि आपके गाँव में Snakebite से जुड़ा कोई अनुभव रहा है या आपके मन में कोई प्रश्न है, तो आप मुझे ईमेल के माध्यम से अवश्य लिख सकते हैं। मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगी कि आपकी सहायता कर सकूँ।
📧 Email: kiyatree.infotech@gmail.com
महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जन-जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी Snakebite उपचार दिशानिर्देशों पर आधारित है। https://rahat.up.nic.in/Pdf/Draft-Module-Standard-Treatment-%20Guideline-Snake%20Bite_v2.pdf
यह लेख किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को साँप काट ले, तो बिना किसी देरी के निकटतम अस्पताल या योग्य चिकित्सक से उपचार अवश्य कराएँ। किसी भी घरेलू उपचार, झाड़-फूँक या अप्रमाणित उपायों पर भरोसा न करें।
अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो…
यदि आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने परिवार, दोस्तों, किसानों, विद्यार्थियों और गाँव के लोगों के साथ अवश्य साझा करें। हो सकता है, आपकी एक शेयर किसी की जान बचाने का कारण बन जाए।
धन्यवाद! सुरक्षित रहें, जागरूक रहें।